कभी-कभार ऐसा होता है कि हमें बहुत जल्दी होती है और हम जरूरी काम करने के लिए कार से उतरते समय चाबी गाड़ी में लगाकर ही छोड़ देते हैं। लेकिन, ऐसा करना आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। कल्पना कीजिए, अगर आप गाड़ी के अंदर चाबी छोड़कर बाहर किसी काम को करने के लिए आते हैं और कुछ देर बाद जब आप लौटते हैं, तो वहां से कार गायब होती है। ऐसी स्थिति में आपके मन में सबसे पहले ख्याल आता है कि क्या बीमा कंपनी कार चोरी को ऐसी स्थिति में कवर करेगी या नहीं?
आमतौर पर लोग कार खरीदते हैं तो उसका इंश्योरेंस करा लेते हैं और कार चोरी पर बीमा कंपनियां पूरा कवरेज देती हैं। वहीं, जब कार के अंदर चाबी रह जाए और गाड़ी चोरी हो जाए, तो इस मामले में नियम और शर्तें अलग हो जाती हैं। बीमा पॉलिसी में साफ लिखा होता है कि अगर कार की चाबी इग्निशन में छोड़ दी है और गाड़ी चोरी हो जाती है, तो बीमा कंपनी इसकी भरपाई नहीं करेगी।
चाबी लगी कार चोरी होने पर, बीमा कंपनी को सबूत के तौर पर आपको सीसीटीवी फुटेज, पुलिस FIR की कॉपी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दिखाने पड़ते हैं।
बीमा कंपनी चोरी के मामले में पूछताछ भी करती है। आपसे पूछा जा सकता है कि कितनी चाबियां थीं, चाबी कहां रखी थी और क्या आपके पास दूसरी चाबी है? अगर आपके पास गाड़ी की दूसरी चाबी है और पहली चाबी चोरी हो गई है, तो आपको इंश्योरेंस मिल सकता है।
चाबी लगी गाड़ी चोरी हो जाए तो क्लेम कैसे करें?
- जब चाबी लगी गाड़ी चोरी हो जाए, तो फौरन पास के पुलिस स्टेशन जाकर FIR दर्ज करवाएं। FIR की एक कॉपी अपने पास रखें।
- जितनी जल्दी हो सके बीमा कंपनी को कॉल करके या मेल करके जानकारी दें। आप बीमा कंपनी को FIR की कॉपी, गाड़ी नंबर और चोरी कैसे हुई की जानकारी दे सकते हैं।
- गाड़ी चोरी होने के बाद, उसका इस्तेमाल गलत न हो इसके लिए RTO जाकर जानकारी दें।
- इंश्योरेंस क्लेम करते समय आपको FIR की कॉपी, बीमी पॉलिसी की कॉपी, गाड़ी का RC, ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी की चाबियां और बीमा क्लेम का फॉर्म भरकर जमा करना होता है।
- अगर पुलिस 30 दिनों के भीतर गाड़ी ढूंढने में असमर्थ रहती है, तो वह एक नॉन-ट्रेसेबल सर्टिफिकेट जारी करती है। बीमा कंपनी के पास इस सर्टिफिकेट को जाकर जमा करना होता है ताकि वे आपके क्लेम को प्रोसेस कर सके।